यो गुरुः स शिवः प्रोक्तो यः शिवः स गुरुः स्मृतः।
उभयोरन्तरं नास्ति गुरोरपि शिवस्य च।।
यतो न वेदा मनसा सहैनमनप्रविशन्ति ततोऽथमौनम्।
यत्रोत्थितो वेदशब्दस्तथायं स तन्मयत्वेन विभाति राजन।
योगसन, स्वच्छता, स्नानादि से शरीर पुष्ट एवं शुद्ध होता है। यद्यपि उनका ध्यान-क्रिया से कोई सीधा संबंध नहीं है, तथापि उनका एक महत्व है। यम, नियम का पालन करने पर आसन, प्राणायाम और प्रत्याहार को अभ्यास करने पर धारणा की अवस्था प्राप्त होती है। धारणा ध्यान की पूर्वावस्था है और ध्यान का परिपाक समाधि है। (समाधि की विभिन्न प्रक्रियाएं, आत्मा का प्रक्षेपण इत्यादि, सिद्ध गुरु के निर्देशन में ही करना चाहिए . ध्यान कोई तन्त्र-मन्त्र नहीं है। मन को बाहर से भीतर की ओर ले जाना और उसे विचारों के स्रोत्र से मुक्त कर देना ही 'ध्यान' हैं। ध्यान मन की एकाग्रता नहीं है, बल्कि मन को भीतरी चेतना के साथ जोड़ना है। ध्यान एक साधना है, जिसके द्वारा हम अपने भीतर आत्मानन्द उपजाते हैं। केसर सब स्थानों पर उत्पन्न नहीं होता है; उसके लिए उपयुक्त स्थान खोजना होता है तथा एक विशेष पद्धति अपनाकर अथक परिश्रम करना होता है। हमें आत्मानंद उपजाने के लिए भी प्रयत्न (साधना) करना होगा। ध्यान-साधना आत्मानन्द-प्राप्ति का एक साधन है। ध्यान सम्पूर्ण मन के मौन के द्वारा उस अवस्थान्तर प्राप्त होने का साधना है, जो बुद्धि-ग्राह्य नहीं है। ध्यान के द्वारा मन अपने संचित ज्ञान एवं अनुभव से अथवा बौद्धिक स्तर से ऊपर उठ जाता है। यह स्थिति कोई रिक्तता अथवा शून्यता नहींहै, बल्कि बुद्धि के व्यापार से मुक्त होकर उस से परे सूक्ष्म चेतना के सागर में प्रवाहित होना है, जो कि स्थूल जगत् के परे है। ब्रह्मसूत्र में "ध्यानाच्च" का भाष्य करते हुए शंकर कहते हैं कि एक प्रत्यय करना ही ध्यान होता है।आध्यात्मिक भूमिका में यह प्रवाह परमानन्द का प्रवाह है।
डॉ दीनदयाल मणि त्रिपाठी
Wednesday, 5 November 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
1 comment:
LOGIN PLEASE WEBSITE ricepuller. in READ public forum BOOKS & VIDEOभारतीयो सुनो 09425636422 +919981011455पर फोन करो - तोतो कि कहानी से सीखो - आ र पी होता नही हे - चावल खींचने कॉपर आइटम, तांबे के प्राचीन सिक्के, क्रेता- विक्रेता, 20 नाखून कछुआ, हर्बल आइटम, कॉपर Iridium सिक्का, इमली पल्प, Lebbo तांबे का सिक्का, लौंग खींचने, लौंग टचर, ज्वाला टेस्ट, rplpmpmmmn, MIRROR gajmukta, हर्बल पौधों, इंदिरा गाँधी सिक्का, पलाश पेड़, लाल प्याज, लिलिपुट और अफवाहों से इससे पह्ले की लुट जाओ - ज़िन्दा गान्धीG को-63
Post a Comment